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And Language Should Never Be a Barrier Any More

अब तक यह कैसे संभव रहा की हिंदी में जैसे कुछ लिखा ही नहीं?
सोलह साल? एक और दो नहीं, पुरे सोलह साल हो गए, और हिंदी के प्रयोग की आवष्यकता ही नहीं हुई. सच ऐसा होता है क्या की हिंदी में सोचते हैं, हिन्दी को बोलते हैं, हिंदी को पहनते हैं....
ना हिन्दू को नहीं, हिंदी को, 
परन्तु हिंदी को लिखा नहीं?
अंग्रेजी में बोलना, लिखना, पढ़ना, सब आसानी से होता रहा तो ज़रुरत ही नहीं हुई हिंदी की. फिर? 
फिर, बच्चों को हिंदी बोलते देखने की इच्छा जागी, क्यों ? 

क्योंकि जब अपने जैसे दीखते बच्चे अपने मुहावरो की सुन्दरता को नहीं सराह पाते, जब हमारे जैसे नामों वाले छोटे छोटे चेहरों पर हिंदी तरानों से जुड़े हिंदी के बोल नहीं आ पाते, और जब 'जूठन' शंब्द के लिए इन बच्चों पे कोई शब्द ही नहीं होता---अंग्रेजी में शब्द नहीं है, और हिंदी इन्हे आती नहीं, तब एहसास होता है की हम हिंदी से जानकार माता -पिता के पास एक कितनी सुन्दर धरोहर है, जो हम इन छोटे छोटे अंतर्राष्ट्रीय नागरिकों को दे सकते हैं. 

मेरे पास हिंदी है, और मैं इन्हे हिंदी दूँगी. यदि तुम्हारे पास मराठी है तो तुम उन्हें वो दो. भाषा---जितनी जानेंगे हम, मेरा यह विश्…